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हापुड : जाट समाज के महाराजा सूरजमल का जन्मदिवस बड़े ही उत्साह के साथ मनाया।

               सूरज मल भरतपुर के महाराजा

Report By- Naveen gautam
हापुड। क्षेत्र के गांव होशयारपुर गढ़ी में जाट समाज के महाराजा सूरज मल का जन्मदिवस बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया।
  (फोटो : हापुड क्षेत्र के गांव होशियारपुर गढ़ी में राजा सूरजमल का जन्मदिन मनाते हुए लोग)

इस अवसर पर क्षेत्र के आस पास के गांवों से काफी संख्या में लोग शामिल रहे। ग्राम नली से सोसायटी चेयरमैन देवेंद्र सिंह, ग्राम लुखराड़ा के पूर्व प्रधान बबलू, सत्येंद्र राठी, देवेंद्र सिंह लेखिन्द्र फौजी, जगबीर सिंह व ग्राम होशियारपुर गढ़ी से पूर्व प्रधान चंद्र सिंह, उदय सिंह, रोहताश सिंह, धर्मपाल सिंह, सगीर खान साहब, अजय सिंह, विजय सिंह, सुभाष सिंह, कपिल सिंह, विजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
इस दौरान गांव ककोड़ी से बिजेन्द्र सिंह व सोसायटी चेयरमैन व अन्य वक्ताओं ने बताया कि महाराजा सूरजमल या सूजान सिंह का जन्म 13 फरवरी 1707 को व मृत्यु 25 दिसम्बर 1763 हुई वह राजस्थान के भरतपुर के हिन्दू जाट शासक थे। उनका शासन जिन क्षेत्रों में था वे वर्तमान समय में भारत की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, बुलन्दशहर, ग़ाज़ियाबाद, फ़िरोज़ाबाद, इटावा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ जिले; राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, अलवर, जिले; हरियाणा का गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात जिलों के अन्तर्गत हैं।
 राजा सूरज मल में वीरता, धीरता, गम्भीरता, उदारता, सतर्कता, दूरदर्शिता, सूझबूझ, चातुर्य और राजमर्मज्ञता का सुखद संगम सुशोभित था। मेल-मिलाप और सह-अस्तित्व तथा समावेशी सोच को आत्मसात करने वाली भारतीयता के वे सच्चे प्रतीक थे। राजा सूरज मल के समकालीन एक इतिहासकार ने उन्हें 'जाटों का प्लेटों' कहा है। इसी तरह एक आधुनिक इतिहासकार ने उनकी स्प्ष्ट दृष्टि और बुद्धिमत्ता को देखने हुए उनकी तुलना ओडिसस से की है।

               सूरज मल भरतपुर के महाराजा
                              बहादुर जंग
                        (महाराजा सूरजमल)
महाराजा सूरजमल 
शासनावधि - 1755 - 1763 AD
राज्याभिषेक - डीग, 22 May 1755
पूर्ववर्ती - बदन सिंह
उत्तरवर्ती - महाराजा जवाहर सिंह
जन्म - 13 फरवरी 1707 (भरतपुर)
निधन - 25 दिसम्बर 1763 (दिल्ली)
जीवनसंगी - महारानी किशोरी देवी
संतान - जवाहर सिंह, नाहर सिंह, रतन सिंह, नवल सिंह, रंजीत सिंह, घराना, सिनसिनवार
पिता - बदन सिंह
माता - महारानी देवकी
सूरज मल के नेतृत्व में जाटों ने आगरा नगर की रक्षा करने वाली मुगल सेना (गैरिज़न) पर अधिकार कर कर लिया। 25 दिसम्बर 1763 ई0 में दिल्ली के शाहदरा में मुगल सेना द्वारा घात लगाकर किए गए एक हमले में सूरजमल की मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के समय उनके अपने किलों पर तैनात सैनिकों के अलावा, उनके पास 25,000 पैदल सेना और 15,000 घुड़सवारों की सेना थी।

महाराजा सूरज मल के शासन मे जाट साम्राज्य
भरतपुर दुर्ग
गोवर्धन में सूरज मल का चित्र जिसे विलियम हेनरी बेकर ने १८१८६० में बनाया था।
भरतपुर जहां स्थित है, वह इलाका सोघरिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था। यहां पर सन 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली गई। सन 1732 में बदनसिंह ने अपने 25 वर्षीय पुत्र सूरजमल को डीग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित सोघर गांव के सोघरियों पर आक्रमण करने के लिए भेजा। सूरजमल ने सोघर को जीत लिया। वहाँ राजधानी बनाने के लिए किले का निर्माण शुरू कर दिया। भरतपुर में स्थित यह किला लोहागढ़ किला ( Iron fort ) के नाम से जाना जाता है। यह देश का एकमात्र किला है, जो विभिन्न आक्रमणों के बावजूद हमेशा अजेय व अभेद्य रहा। बदन सिंह और सूरजमल यहां सन 1753 में आकर रहने लगे।

भरतपुर के किले का निर्माण-कार्य शुरू करने के कुछ समय बाद बदनसिंह की आंखों की ज्योति क्षीण होने लगी। अतः उसने विवश होकर राजकाज अपने योग्य और विश्वासपात्र पुत्र सूरजमल को सौंप दिया। वस्तुतः बदनसिंह के समय भी शासन की असली बागडोर सूरजमल के हाथ में रही।

मुगलों, मराठों व राजपूतों से गठबंधन का शिकार हुए बिना ही सूरजमल ने अपनी धाक स्थापित की। घनघोर संकटों की स्थितियों में भी राजनीतिक तथा सैनिक दृष्टि से पथभ्रांत होने से बचता रहा। बहुत कम विकल्प होने के बावजूद उसने कभी गलत या कमजोर चाल नहीं चली। उसने यत्न किया कि संघर्ष का पथ अपनाने से पहले सब शांतिपूर्ण उपायों को अवश्य आज़माया जाए।
नवजात जाट राज्य की रक्षा करने और उसे सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसने साहस तथा सूझबूझ का परिचय दिया।