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भोलेनाथ को क्‍यों पसंद है सावन मास और कैसे करें प्रत‍िद‍िन सावन में श‍िवजी की पूजा, भोलेनाथ को क्‍यों पसंद है यह सावन मास


By- Brijesh gupta
 देवरिया। सावन का महीना आते हैं हर तरफ भोलेनाथ के जयकारे लगने लगते हैं। क्‍या घर क्‍या श‍िवालय हर जगह वातावरण भक्तिमय हो जाता है। प्रकृत‍ि में भी हर तरफ हर‍ियाली ही हर‍ियाली रहती है। यानी क‍ि ये कहें क‍ि सावन मतलब प्रेम और भक्ति से भरा महीना है तो गलत नहीं होगा। लेक‍िन क्‍या आपके मन में कभी यह सवाल उठता है क‍ि श‍िवजी को यही महीना इतना पसंद क्‍यों है और इस महीने में अगर न‍ियम‍ितरूप से उनकी पूजा करनी हो तो उसका क्‍या न‍ियम है? अगर हां तो समझिए की आपको सारे सवालों के जवाब , आइए जानते हैं…

श‍िवजी ने स्‍वयं बताई है सावन मास की मह‍िमा
सावन का महीना ही एक ऐसा महीना होता है ज‍िस दौरान सबसे अधिक वर्षा होती है जो शिवजी के गर्म शरीर को ठंडक प्रदान करती है। सावन महीने की मह‍िमा भोलेनाथ ने भी बताई है। धर्मशास्‍त्रों के अनुसार श‍िवजी के तीनों नेत्रों में सूर्य दाएं, बांये चंद्र और अग्नि मध्य नेत्र है। जब सूर्य कर्क राशि में गोचर करता है, तब सावन महीने की शुरुआत होती है। सूर्य गर्म है जो उष्मा देता है जबकि चंद्रमा ठंडा है जो शीतलता प्रदान करता है। इसलिए सूर्य के कर्क राशि में आने से खूब बरसात होती है। जिससे लोक कल्याण के लिए विष को पीने वाले भोले को ठंडक व सुकून मिलता है। प्रजनन की दृष्टि से भी यह मास बहुत ही अनुकूल है। इसी कारण शिव को सावन प्रिय हैं।


सावन सोमवार व्रत से म‍िलता है अपार लाभ
यूं तो प्रत्‍येक सोमवार का अपना महत्‍व है लेक‍िन सावन के सोमवार का व्रत करने से अपार लाभ म‍िलता है। मान्‍यता है क‍ि सावन में शिवजी की आराधना और सोमवार व्रत करने से वह अत्‍यंत शीघ्र ही प्रसन्‍न होते हैं और मनोवांछ‍ित सभी कामनाओं की पूर्ति करते हैं। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत करने पुत्र की इच्छा करने वाले को पुत्र, विद्यार्थी को विद्या, धनार्थी को धन, मोक्ष चाहने वालो को मोक्ष, कुंवारी कन्या को मनोनुकूल पति और सुहाग‍िनों को अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है।


इसल‍िए व‍िशेष महत्‍वपूर्ण है सावन मास का व्रत
सावन मास में व्रत का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि कुंवारी कन्या यदि इस पूरे महीने व्रत रखती हैं तो उन्हें मनपसंद जीवनसाथी मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती जब ब‍िन बुलाए अपने पिता दक्ष के यज्ञ आयोजन में पहुंची तो वहां सभी ने उनका अपमान क‍िया। इसी तो उन्होंने सह ल‍िया लेक‍िन जब उन्होंने प‍िता द्वारा अपने पति का अपमान होता देखा तो आत्मदाह कर लिया। इसके बाद देवी सती ने पार्वती रूप में जन्‍म लिया और श‍िवजी को पत‍ि रूप में प्राप्‍त करने के ल‍िए सावन सोमवार का व्रत क‍िया। कहते हैं क‍ि इसी व्रत के प्रभाव से माता पार्वती को भोलेनाथ प्राप्‍त हुए।

सावन में न‍ियम‍ित रूप से ऐसे करें श‍िवजी की पूजा
सावन में न‍ियम‍ित रूप से सुबह-सवेरे नित्‍य कर्मों से निवृत्‍त होकर किसी भी शिव मंदिर में जाएं। वहां शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाएं। इसके बाद भांग मिला हुआ कच्‍चा दूध चढ़ाएं। फिर गन्‍ने का रस चढ़ाएं साथ ही ऊं नम: शिवाय मंत्र का जप करते रहें। मंत्र का उच्‍चारण आप अपनी श्रद्धानुसार 11, 21, 51 या फिर 108 बार कर सकते हैं। इसके बाद ‘रूप देहि जयं देहि भाग्‍यं देहि महेश्‍वर:। पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान्‍कामांशच देहि मे।।’ मंत्र का जप करें। साथ ही शिवलिंग पर पुन: जल चढ़ाएं। इसके बाद फूल, अक्षत, धतूरा, आंकड़े का फूल और बेल पत्र चढ़ाएं फिर धूपबत्‍ती और दीपक जलाएं। इसके बाद भोलेनाथ की आरती पढ़ें।


आरती के बाद पढ़ें यह मंत्र और करें पूजा का समापन
आरती पढ़ने के बाद ‘कपूर्रगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेंद्रहारं। सदा वसंत हृदयाविंदे भंव भवानी सहितं नमामि।।’ को पांच बार पाठ करें। अंत में भोले भंडारी से प्रार्थना करें कि वह आपके समस्‍त कष्‍टों को दूर करें और सुख-समृद्धि का वरदान दें। ध्‍यान रखें कि पूजा करते समय मन में किसी भी तरह का छल-कपट या फिर किसी भी व्‍यक्ति के प्रति ईर्ष्‍या-द्वेष न लेकर आएं। सच्‍चे मन से शिव की पूजा करें। वह जीवन में आने वाली सारी परेशानियों को दूर कर देते हैं।
भगवान शिव का प्रिय मास सावन आरंभ हो चुका है और आज सावन का पहला सोमवार है। आज शिव भक्‍त मंदिर में जाकर पूजा कर रहे हैं और जलाभिषेक कर रहे हैं। सावन के महीने में रुद्राभिषेक का खास महत्‍व होता है। सनातन धर्म की मान्‍यआतों में रुद्राभिषेक के लिए कुछ वस्‍तुओं का होना जरूरी माना गया है। आज हम आपको रुद्राभिषेक में प्रयोग होने वाली 10 दस वस्‍तुओं और उनके महत्‍व के बारे में बता रहे हैं।

दूध से रुद्राभिषेक
सावन ही महीना शिवजी को सबसे प्रिय है और इस महीन के प्रत्‍येक सोमवार को जो दूध से शिवजी का अभिषेक करता है, भगवान शिव उनकी खाली झोली भर देते हैं और उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी करते हैं।


दही से रुद्राभिषेक
ऐसी मान्‍यता है कि अगर भगवान शिव का अभिषेक दही से किया जाए तो आपके काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और आपको हर प्रकार की कार्य सिद्धि का आशीर्वाद प्राप्‍त होता है। सावन के महीने में दही से शिवजी का अभिषेक करने से आपको हर प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है।

शहद से रुद्राभिषेक
शिवजी की प्रिय वस्‍तुओं में से एक शहद से रुद्राभिषेक करने का खास महत्‍व होता है। शहद से शिवजी का रुद्राभिषेक करने से व्‍यक्ति को सम्‍मान और ऊंचा औहदा प्राप्त होता है। इसके साथ ही शहद से शिवजी का अभिषेक करने से शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव समाप्‍त होते हैं।

इत्र से रुद्राभिषेक
ऐसे जातक जो नींद की समस्‍या से परेशान रहते हैं या फिर उनको किसी प्रकार की मानसिक बीमारी है या फिर जीवन में किसी प्रकार का तनाव है तो ऐसे लोगों को सावन के महीने में इत्र से शिवजी का रुद्राभिषेक करना चाहिए। इत्र से रुद्राभिषेक करने से आपके जीवन में शांति स्‍थापित होती है।

घी से रुद्राभिषेक
सावन के महीने में शिवजी का रुद्राभिषेक घी से करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि घी से रुद्राभिषेक करने से आपको अच्‍छी सेहत ही प्राप्ति होती है। अगर जातक काफी समय से किसी बीमारी से जूझ रहा है या फिर ऐसे लोगों के सावन के हर सोमवार को शिवजी इत्र अर्पित करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगता है।


गंगाजल से रुद्राभिषेक
सावन के महीने में गंगाजल से रुद्राभिषेक करने से जातकों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। मान्‍यता है कि गंगाजल से रुद्राभिषेक करने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्‍म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

पंचामृत से रुद्राभिषेक
ऐसी मान्‍यता है कि सावन में पंचामृत शिवजी को अर्पित करना बहुत शुभ होता है। ऐसी मान्‍यता है कि मन में कोई मनोकामना सोचकर यदि पंचामृत से शिवजी का रुद्राभिषेक किया जाए तो जातकों की सभी इच्‍छाओं की पूर्ति होती है।

गन्‍ने के रस से रुद्राभिषेक
अगर आप काफी समय ये धन की समस्‍या से जूझ रहे हैं या फिर आपके हाथ में पैसा रुकता नहीं है तो सावन के महीने में गन्‍ने के रस से शिवजी का अभिषेक करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है और आपको धन समृद्धि मिलती है।

जल से रुद्राभिषेक
सावन में रुद्राभिषेक अगर जल से करें तो ऐसा माना जाता है कि जात‍क को बेहद शुभ परिणाम प्राप्‍त होता है। मान्‍यता है कि सावन में जल से रुद्राभिषेक करने से जातक को बुखार में राहत मिलती है।

सरसों के तेल से रुद्राभिषेक
सावन में रुद्राभिषेक करने के लिए सरसों का तेल भी बहुत खास माना जाता है। मान्‍यता है कि सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करने से पहले किसी ज्‍योतिषी की सलाह लेनी चाहिए। मान्‍यता है कि सावन में सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करने से शनि की अशुभ दशा में राहत मिलती है।