हापुड़। मंगलवार को नगरपालिका स्थित धरना स्थल पर भारत मुक्ति मोर्चा व बहुजन क्रांति मोर्चा द्वारा राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत धरना प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट मुकेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन को बहुजन मुक्ति पार्टी, बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारतीय विद्यार्थी युवा, बेरोजगार मोर्चा, राष्ट्रीय घुमंतू जन जाति मोर्चा, राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद्, राष्ट्रीय मायनॉरिटी मोर्चा एवं सभी सहयोगी संगठनो ने समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन 21 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन 25 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर श्रृंखलाबद्ध आमरण अनशन, 31 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर रैली प्रदर्शन व 6 नवंबर को 11 लाख लोगों का राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आरएसएस तथा भाजपा का संविधान द्रोह, उत्तर प्रदेश में भी भाजपा सरकार द्वारा संविधान द्रोह, संविधान बदलने की साजिश के विरोध में, ईवीएम का आरएसएस-बीजेपी भी इस्तेमाल कर रही है। ओबीसी की जाति आधारित गिनती न करने के विरोध में आरएसएस के द्वारा आदिवासियों को जबरदस्ती से हिन्दू बनाया जा रहा है, इसके विरोध में, आरएसएस-भाजपा के द्वारा ओबीसी को जोर-जबरदस्ती हिन्दू बनाने का काम चल रहा है, इसके विरोध में, आरएसएस के द्वारा बौद्ध विरासत पर कब्जा किया जा रहा है, 4 इसके विरोध, फोन टेपिंग के विरोध में, आरएसएस, भाजपा को इतना डर सता रहा है कि सामाजिक संगठन के नेता वामन मेश्राम और डा. विलास खरात का फोन टेपिंग किया जा रहा है। इसके विरोध में आरएसएस के विरोध में आंदोलन करना अत्यंत जरूरी है।
भारत मुक्ति मोर्चा व बहुजन क्रांति मोर्चा द्वारा राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन निम्न मुद्दो को लेकर किया जा रहा है।
1. आरएसएस तथा भाजपा का संविधान द्रोह : 27 जून 2022 को हरियाणा के रोहतक जिले में भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा डीएनए परिषद् का आयोजन किया था। इस परिषद का विरोध करने के लिए आरएसएस और भाजपा के संबंधित ब्राह्मण सामने आये। बीजेपी के रोहतक जिले का निरज कुमार वत्स और जय हिन्द नवीन जैसे ब्राह्मणों ने आगे आकर धमकियां देने तथा परशुराम के फरसे दिखाकर हत्या तक करने की धमकियां दी। ये सब हरियाणा सरकार के सहयोग एवं इशारे पर हो रहा था। डीएम तथा एसपी के द्वारा कार्यक्रम स्थल को पुलिस छावनी में तब्दिल करना और हॉल के मालिक को कार्यक्रम रद्द करवाने के लिए धमकियां देना यह अपने आप में सबूत है कि आरएसएस और भाजपा के इशारे पर चल रहा था। रोहतक एमपी अरविन्द शर्मा (भाजपा) ने भी इस कार्यक्रम का खुलकर विरोध किया था। डीएनए कांफ्रेंस से ब्राह्मणों को इतना क्यों डर लग रहा है? डीएनए के मामले में वे चर्चा क्यों नहीं होने देना चाहते हैं? एक तरफा झूठी बकवास करने वाले ब्राह्मणों को उनकी असलीयत देश और दुनियां में न आ जाय इसका डर है। डीएनए अनुसंधान और राखीगढ़ी डीएनए अनुसंधान के द्वारा ब्राह्मण विदेशी हैं यह बात सिद्ध हो गई है। इसके बावजूद आरएसएस एवं भाजपा के इशारे पर राखीगढ़ी स्थल जो हड़प्पा-मोहेनजोदरो नगरों का हिस्सा है, यह सभ्यता ब्राह्मण भारत में आने के पहले ही विकसित सभ्यता थी। ब्राह्मण राखीगढ़ी डीएनए के अनुसार विदेशी सिद्ध हुआ है। राखीगढ़ी सभ्यता में मिले कंकाल का समय 4,700 वर्ष पुराना मिला है और ब्राह्मण भारत में आज से 4,000 वर्ष पहले आये। इसलिए ब्राह्मणों का राखीगढ़ी डीएनए नहीं मिला। अब आरएसएस-भाजपा ने सरकारी संस्थाओं का असंविधानिक तरीके से इस्तेमाल शुरू किया है। इसके तहत ही भारतीय पुरातत्व विभाग को आगे करके राखीगढ़ी सभ्यता जो हडप्पा सभ्यता का हिस्सा है उसे 'वैदिक सभ्यता या सिंधु-सरस्वती सभ्यता' नाम बहुजनों के संस्कृति एवं सभ्यता पर आक्रमण किया जा रहा है। हरियाणा सरकार एवं रोहतक प्रशासन ने हमारे मौलिक अधिकारों का हनन किया। यह संविधान द्रोह है। इसलिए संविधान को बचाने के लिए आरएसएस के विरोध में चार चरणों में आंदोलन घोषित किया गया है।
2. उत्तर प्रदेश में भी भाजपा सरकार द्वारा संविधान द्रोह: दिनांक 21 अगस्त 2022 को कानपुर में बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का 37वां उत्तर प्रदेश राज्य अधिवेशन था। इस अधिवेशन को आरएसएस-भाजपा के लोगों ने खुलकर विरोध किया। आरएसएस ने अपने कुछ नाजायज बच्चों को जैसे कि दुर्गेश मणि त्रिपाठी (मैं ब्राह्मण हूं महासभा) को आगे करके विरोध किया। रोहित तिवारी, थाना प्रभारी गोविन्द नगर, विकास कुमार पाण्डे उप पुलिस आयुक्त एवं आनंद प्रकाश तिवारी संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था, कानपुर जैसे ब्राह्मण अधिकारियों को आगे करके बामसेफ के प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करवाया। धारा-144 लगाकर कार्यक्रम स्थल को छावनी में तब्दिल करवाया। यह जनता के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला था। जैसे कोई भारत में इमरजेंसी लागू हुई हो। यह सब आरएसएस और भाजपा के द्वारा संविधान द्रोह किया जा रहा है। इसलिए भी संविधान को बचाने हेतु आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
3. संविधान बदलने की साजिश के विरोध में : लॉकडाउन को आरएसएस के प्रमुख ने अवसर कहा था। लॉकडाउन के दरम्यान ही कई सारे लेबर एक्ट खत्म कर दिये गये और ढेर सारी सरकारी कंपनियां एवं उद्योगों को कौडियों के मोल में पूंजीपतियों को बेच दिया गया। यह संविधान खत्म करने की प्रक्रिया ही है। लॉकडाउन के दरम्यान ही नये हिन्दू राष्ट्र (ब्राह्मणों का गुलाम राष्ट्र) के संविधान की बातें हो रही थी। अब 12 अगस्त 2022 को दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबारों में हिन्दू राष्ट्र के संविधान का प्रारूप तैयार है और वह संविधान वर्ण व्यवस्था आधारित रहेगा, ऐसी बातें उस खबर में छपकर आई थी। हिन्दू राष्ट्र यानी ब्राह्मणों के अधीन गुलाम राष्ट्र। जो बातें वे आज कह रहे हैं उन बातों पर अल्पसंख्य विदेशी ब्राह्मणों ने कब्जा कर लिया है। देश के सभी सवैधानिक संस्थाओं को निष्प्रभावित कर दिया है। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
4. ईवीएम का आरएसएस-बीजेपी भी इस्तेमाल कर रही है। 2004 के चुनाव में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम को लाया गया। कांग्रेस ने 2004 और 2009 को ईवीएम का इस्तेमाल करते हुए चुनाव जीता। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस घोटाले के सबूत इकट्ठा किये और सुप्रीम कोर्ट को दिये। सुब्रह्मण्यम स्वामी के सबूतों को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया और केवल ईवीएम मशीन के द्वारा फ्री, फेअर और ट्रांसपरंस चुनाव नहीं हो सकता और फ्री, फेअर, ट्रांसपरंस चुनाव के लिए ईवीएम मशीन के साथ पेपर ट्रेल मशीन लगानी होगी यह सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया। कांग्रेस ने ईवीएम मशीन में घोटाला किया इसकी वजह से कांग्रेस को आरएसएस-भाजपा से समझौता करना पड़ा। और आरएसएस-भाजपा ने कांग्रेस के साथ समझौता करके • 2014 और 2019 को ईवीएम घोटाला करने के लिए कांग्रेस को रजामंद किया। मगर, 24 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने वामन मेश्राम की केस में 100 प्रतिशत पेपर ट्रेल मशीन लगाने का ऑर्डर दिया। और 2019 को आरएसएस-भाजपा का घोटाला करके चुनाव जीतना असंभव हो गया। इसलिए आरएसएस-भाजपा ने समझौते के अनुसार कांग्रेस को 2019 के चुनाव में मदद करने के लिए कहा। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी के द्वारा वामन मेश्राम के केस के विरोध में केस दायर किया। और पेपर ट्रेल के रिकाउंटिंग के बजाए ईवीएम मशीन के साथ 50 फीसद मिलान करने की मांग की। 08 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मिलान करने की बात को स्वीकार किया और 1 फीसद वोटों का मिलान करने का आदेश दिया। और 100 फीसद रिकाउंटिंग के ऑर्डर को साइड कर दिया। इस वजह से भाजपा को चुनाव जीतना संभव हुआ। 140 करोड़ लोगों के लोकतंत्र को आरएसएस-भाजपा ने धोखा करके लोकतंत्र की हत्या किया। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
5. ओबीसी की जाति आधारित गिनती न करने के विरोध में : 1931 तक ओबीसी की जाति आधारित गिनती लगातार होती रही। तथाकथित आजाद के बाद वह गिनती बंद कर दी गई। कांग्रेस और भाजपा ने ओबीसी के सा बहुत बड़ी धोखेबाजी की है। आरएसएस और भाजपा खुलकर ओबीसी जाति आधारित गिनती का विरोध करते हैं। न्यायपालिका में प्रधानमंत्रे न मोदी के द्वारा ओबीसी की जाति आधारित गिनती ना करने के संदर्भ हलफनामा तक दिया था। यह सब मोहन भागवत के कहने पर किया गया इसलिए भी आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
6. मुसलमानों के साथ-साथ सभी धार्मिक अल्पसंख्यांक समुदाय को आरएसएस-भाजपा के लोग दोयम दर्जे के नागरिक मानते हैं। इसलिए भी आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।।
7. आरएसएस के द्वारा आदिवासियों को जबरदस्ती से हिन्दू बनाया जा रहा है, इसके विरोध में : आदिवासी प्रकृति पूजक है, वे सरना धर्म को मानते हैं। आदिवासी को आरएसएस के द्वारा जनगणना में हिन्दू घोषित करने का मोहन भागवत की योजना है। साथ ही एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाकर उसके द्वारा मंदिरों की साफ-सफाई करवाना और राष्ट्रपति चुनकर आने के बाद उसका वैदिक मंत्रेच्चार करके उसका शुद्धिकरण करके ही राष्ट्रपति घोषित किया है। आदिवासियों को एक तरफ हिन्दू या वनवासी घोषित करना और दूसरी तरफ बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे द्वारा विदेशी घोषित करना यह बहुत बड़ी साजिश है। इसलिए आरएसएस के मुख्यालय पर मोर्चा निकालना बहुत जरूरी है।
8. आरएसएस-भाजपा के द्वारा ओबीसी को जोर-जबरदस्ती हिन्दू बनाने का काम चल रहा है, इसके विरोध में : स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हिन्दू मुस्लिमों के द्वारा दी गई गाली है, जिसका अर्थ-दुष्ट, नीच, कपटी, छली, गुलाम बताया है। (सत्यार्थ प्रकाश, पृ.81) ओबीसी को सवैधानिक अधिकारों से वंचित करने के लिए और उनका इस्तेमाल करने के लिए षड्यंत्र्तापूर्वक हिन्दू बनाया गया है। आक्रमणकारी मुसलमानों ने जो गाली के तौर पर हिन्दू शब्द दिया है उसी गाली को आरएसएस के ब्राह्मण इस्तेमाल करते हैं, हम इसका विरोध करते हैं। देश के ब्राह्मण हिन्दू के नाम पर ओबीसी को गाली दे रहे हैं। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
9. आरएसएस के द्वारा बौद्ध विरासत पर कब्जा किया जा रहा है, 4 इसके विरोध में मद्रास हाईकोर्ट के द्वारा मुनियप्पन स्वामी की मूर्ति यह - मूलतः बुद्ध की मूर्ति है, यह फैसला सुनाया। इस फैसले के आधार पर | भारत के तमाम प्रसिद्ध मंदिरों के अंदर बुद्ध की मूर्तियां तथा बौद्ध अवशेष न पड़े हुए हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि हिंसा के द्वारा प्रतिक्रांति करके आक्रांता विदेशी ब्राह्मणों ने देश पर कब्जा किया है। इसी तर्ज पर आज भी बौद्ध विरासतों पर वे कब्जा कर रहे हैं। डॉ. बाबसाहब अंबेडकर जन्म स्थली, महू पर तथा दीक्षा भूमि पर आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद् का कब्जा यह इसका सबूत है। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
10. आरएसएस का राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण और इंद्र कुमार मेघवाल की हत्याः राजस्थान के जालोर जिले के सायला क्षेत्र के सुराना गांव के तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र इंद्रकुमार मेघवाल (उम्र 9 वर्ष) के ऊपर जिस तरीके से अत्याचार करके हत्या हुई, यह फिनामिना देशव्यापी है। और यह ब्राह्मणों की वर्ण व्यवस्था, जाति व्यवस्था की वजह से है। जैसे-जैसे आरएसएस का राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण बढ़ रहा है वैसे-वैसे अत्याचार की संख्या बढ़ गई है। राजस्थान का उदाहरण इस बात का सबूत है। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी हो गया है।
11. आरएसएस का राष्ट्रवाद ब्राह्मणी आतंकवाद पर खड़ा है: महाराष्ट्र राज्य के पूर्व आईजी एस. एम. मुश्रिफ ने 'बम फोड़े ब्राह्मणों ने और सूली पर चढ़ाये गये बेकसूर मुसलमान इस शोध ग्रंथ के आधार पर सिद्ध किया है कि आरएसएस यह आतंकवादी संगठन है और यह देश और लोकतंत्र के लिए खतरा है। अजमेर शरीफ बम ब्लास्ट केस के मामले में आरएसएस के में लोगों को आजीवन कारावास हुआ है। पूरे देशभर में आरएसएस के ब्राह्मणों ने बम ब्लास्ट किये हैं। इसलिए उनके तथाकथित राष्ट्रवाद की बुनियाद आतंकवाद पर खड़ी है। फरवरी 2008 को लेपिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने 7 गुप्त मिटिंग में साफ शब्दों में कहा था कि 'यह देश हमारा नहीं है इसलिए हमें इस देश के संविधान के खिलाफ तथा देशवासियों के खिलाफ लड़ना होगा।' इस वक्तव्य के आधार पर सिद्ध हुआ है कि ब्राह्मण भारत के मातृभूमि के साथ तथा संविधान के साथ वफादार नहीं है। भाजपा 2014 में केन्द्र में आने के बाद ही लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को जमानत मिली। जबकि, मिलिट्री इंटेलीजेंस ब्यूरो ने पुरोहित को आतंकवादी गतिविधियों में पाया, इसकी जांच की थी और उसे दोषी माना था। कर्नल पुरोहित और मोहन भागवत का एक साथ का फोटो भी है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मध्य प्रदेश से भाजपा ने टिकट देकर जितवाया और संसद भेजा। जबकि, मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में वह सहभागी है। इसलिए आरएसएस के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी है।
12. बिलकिस बानों को न्याय कहां मिला? : बिलकिस बानो के बलात्कार और उसके परिवार के लोगों के हत्यारे ब्राह्मण और तत्सम ऊंचे जाति के लोगों को छोड़ दिया गया। ग्यारह में से एक व्यक्ति ने माफ करने वाली अर्जी गुजरात हाई कोर्ट को दी थी। गुजरात हाई कोर्ट ने उसे सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को उसके अर्जी पर विचार करने के लिए कहा। गुजरात के आरएसएस की सरकार इतनी महान है कि उन्होंने इस पर विचार करने के लिए कमेटी बनाई और उसका अध्यक्ष जिलाधिकारी को बनाया जो राज्य सरकार का नौकर होता है। जिलाधिकारी ने सरकार के आदेश के अनुसार ग्यारह लोगों को निर्दोष छोड़ दिया। गुजरात की सरकार चलाने वाले लोग आरएसएस के ही कुपूत हैं, इसलिए आरएसएस के मुख्यालय पर मोर्चा ले जाना अत्यंत जरूरी है।
13. फोन टेपिंग के विरोध में आरएसएस, भाजपा को इतना डर सता रहा है कि सामाजिक संगठन के नेता वामन मेश्राम और डा. विलास खरात का फोन टेपिंग किया जा रहा है। इसके विरोध में आरएसएस के विरोध में आंदोलन करना अत्यंत जरूरी है।
14. एक तरफ आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर महोत्सव मनाना और दूसरी तरफ आजादी के 75 साल बाद भी देश के 12 करोड़ घुमंतू जन जातियों को Recognize तथा Right से वंचित रखना और आरएसएस एवं ब्राह्मणों द्वारा उनका ब्राह्मणीकरण करना, इसके विरोध में चरणबद्ध आंदोलन जरूरी है।


