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निर्वाण प्राप्त श्रद्धेय मा० मिथन सिंह बौद्ध-भीम मिशन के सच्चे सिपाही

 निर्वाण प्राप्त श्रद्धेय मा० मिथन सिंह बौद्ध-भीम मिशन के सच्चे सिपाही

By- Naveen Gauram
बाबा साहब एवं तथागत बुद्ध के कारवाँ को आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले लोगों में निर्वाण प्राप्त श्र० मा० मिथन सिंह बौद्ध जी का नाम बड़े आदर व सम्मान से लिया जाता है। श्रद्धेय बौद्ध जी का जन्म 1933 में ग्राम सरावा (मेरठ) में हुआ था बौद्ध जी के पिता का नाम श्रद्धेय प्रभुदयाल तथा माता का नाम श्रद्धेया गंगावती था। बौद्ध जी की प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम सरावा में हुई, उस समय की परिस्थितियों के कारण वह ज्यादा नही पढ़ें पाये बौद्ध जी की शादी गाम मतनौरा के श्रद्धेय काले सिंह की पुत्री ज्ञानवती के साथ हुयी थी। उस समय आज के मुकाबले भेदभाव तथा सामाजिक असमानता तथा जमीदारों, दबंगों के अत्याचार बहुत ज्यादा थे।
इन सबका विरोध करने तथा समाज को जागरूक करने में लगे रहने के कारण कई बार बौद्ध जी को अपमान तथा हमलो का सामना करना पड़ा, गाँव में ऐसे ही एक हमले में बौद्ध जी की माता जी पत्नी तथा स्वयं बौद्ध जी भी घायल हो गये, जिसमें बौद्ध जी की पत्नी गम्भीर रूप से घायल हो जाने की वजह से लम्बी बीमारी से घिर गयी लम्बे उपचार के बाद सन् 1978 में मेरठ मैडिकल कालिज में बौद्ध जी की पत्नी का निधन हो गया। बाबा साहब के 1953 में मेरठ आगमन पर बौद्ध जी को उन्हें सुनने व देखने का मौका मिला तथा 1963 में बौद्ध जी ने विधिवत् बौद्ध धम्म ग्रहण करके अपने गायन, भजनों व गीतों के माध्यम से पूरे देश में बाबा साहब व तथागत बुद्ध के उपदेशों व मिशन का प्रचार प्रसार किया। बौद्ध जी श्री बुद्धप्रिय मौर्य के साथ एक दलित आन्दोलन में जेल भी गये। अल्पशिक्षित होते हुवे भी लगातार अध्ययन के कारण बौद्ध जी को बाबा साहब तथा बौद्ध धम्म की काफी अच्छी जानकारी थी।
उन्होने कई किताबें, जैसे:-भीम ज्ञान गीतावली, दलित समस्याएँ एवं समाधान, मिथुन के कथन सोचो और बदलो स्वतन्त्र भारत में गुलामी आदि लिखकर तथा मासिक हिन्दी समाचार पत्र रिपब्लिकन इकबाल के माध्यम से दलितो, पिछड़ों को जागरूक करने का काम किया । उन्होने उ0प्र0 में कई बार दलित चेतना रथ यात्राएँ भी निकाली तथा बाबा साहब के असली राजनैतिक दल रिपब्लिकन पार्टी में कई बार उ०प्र० के अध्यक्ष रहे।

उन्हें अन्य राजनैतिक पार्टियों से भी निमन्त्रण आये लेकिन वह मरते दम तक आर०पी०आई० में ही रहे। उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर से विधानसभा तथा बिजनौर से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा । उन्होंने कई बौद्ध सम्मेलनों तथा दलित सम्मेलनों में भाग लिया, भारतीय बौद्ध महासभा उ०प्र० के बौद्ध जी विशेष आमन्त्रित सदस्य आजीपन रहे ।बौद्ध जी बहुत स्वाभिमानी व्यक्ति थे तथा अपनी बात को निडरता, निर्भिकता, दृढ़ता व तर्कपूर्ण तरीके से रखते थे चाहे सामने कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो। उन्होने बाबा साहब के मिशन के आगे अपने परिवार की भी परवाह नहीं की। बौद्ध जी हमेशा दलितों पिछड़ों को पाखण्डवाद, अन्धविश्वास, कर्मकाण्ड व आडम्बरों से दूर रहते हुवे अपना धन व समय अपने परिवारों व बच्चों की अच्छी शिक्षा दीक्षा में खर्च करके एक अच्छा समाज बनाने की बात कहते थे । बौद्ध जी का निर्वाण कैन्सर की बीमारी के कारण दिनांक 10 जनवरी सन् 2003 को हुआ था। आज के समय में श्रद्धेय मा० मिथन सिंह बौद्ध जैसे समाजसेवी, अम्बेडकर मिशन तथा गौतम बुद्ध के उपदेशों को समाज में प्रचार प्रसार करने वाले शायद ही देखने को मिलेंगे। हम सभी को बौद्ध जी से प्रेरणा लेकर समाज हित में ज्यादा से ज्यादा कार्य करने चाहिए।