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हापुड़ : भाव तुम्हारा, दूध हमारी मर्जी का यही कारण है कि शहरों में लोग अपने सामने दूध निकलवाते है।

रिपोर्ट - नवीन गौतम/लक्ष्मण सिंह 
हापुड़। जनपद के किसानों को स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बाबूगढ़ के प्रभारी अरविन्द कुमार ने सुझाव सुझाव देते हुए बताया कि दूध जो कि स्वच्छ स्थान में स्वच्छ तथा स्वस्थ्य पशु गाय/भैंस से स्वस्थ्य दूध दोहने वाले (ग्वाला) द्वारा निकाला गया दूध जिसमें बाहरी गंदगी जैसे पशु के बाल, धूल, चारे के टुकडें इत्यादि बहुत कम मात्रा में हो और जिसमें हानिकारक कीटाणुओं (बैक्टीरिया) कि संख्या व दृष्टिगोचर पदार्थ कम से कम मात्रा में हो और अच्छे स्वाद का हो उसे हम स्वच्छ दूध कहते है। 

सोमवार को पशुओं के डॉक्टर पीके मेंडके ने टीम मेंबर डॉ0 विनीता सिंह, डॉ0 नीलम कुमारी, डॉ0 अभिनव कुमार, डॉ0 अरविंद कुमार के साथ गावों में जाकर किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में स्वच्छ दूध उत्पादन का महत्व बहुत बढ़ गया है और विश्व दुग्ध बाजार की नीतियों को देखते हुये अब यह अति अनिवार्य है कि ग्रामीण स्तर पर स्वच्छ एवं गुणवत्ता वाला दूध दुधारू पशुओं से उत्पादित हो। हमारे भारत देश में दूध का उत्पादन मुख्य तौर पर गाँवों, कस्बों, शहरों तथा फार्मे पर किया जाता है। गाँवों में लगभग 90 प्रतिशत कुल दूध का उत्पादन होता है। गाँवों में अज्ञानता के कारण स्वच्छ दूध का उत्पादन करना काफी कठिन है क्योंकि गाँवों में पशुपालक पशुओं के साथ एक ही कमरे में रहते है तथा गोबर से भरे फर्श पर ही पशुओं को बाँधते है। पशुओं व पशुशाला की साफ सफाई पर भी कम ही ध्यान देते हैं। जिसे स्वच्छ दूध का उत्पादन करना कठिन हो जाता है । आप सभी अच्छी तरह जानते है कि दूध शीघ्र नाशवान होता है। अस्वच्छ दूध शीघ्र ही खराब हो जाता है। खटटा और स्वाद बिगडा दूध तथा फ्रिज बाजार में नही बिक पाते । घटिया किस्म के दूध को ग्राहक अस्वीकार कर देता है। जबकि अच्छे किस्म के दूध की माँग कायम रहती है। खराब दूध के उपयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, वह यह भी जानता है कि खराब दूध को अधिक समय तक नही रखा जा सकता दूध जितना स्वादिष्ट होगा उतना ही देर तक वह ताजगी और पौष्टिक अवस्था में रखा जा सकता है । शहरों में देखा व सुना गया है कि लोग दूध बेचने वाले को पैसे जितने चाहे ले लो पर दूध स्वच्छ व साफ अधिक वसा वाला होना चाहिये। भाव तुम्हारी मर्जी का और दूध हमारी मर्जी का यही कारण है कि शहरों में लोग अपने सामने दूध निकलवाते है।