'विश्वगुरु' बनने के लिए भारतीय भाषाओं में तालमेल जरूरी: प्रो. संजय सिंह बघेल
श्री अरविंद महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री अरविंद महाविद्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर 'डिजिटल युग में मातृभाषा की भूमिका' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न भाषाओं के विद्वानों ने मातृभाषा के महत्व और उसकी भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
हिंदी, संस्कृत और बांग्ला का दिखा अनूठा संगम
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मीडिया विशेषज्ञ एवं मोटिवेशनल स्पीकर प्रोफेसर संजय सिंह बघेल ने डिजिटल दौर में हिंदी और उसकी बोलियों के उज्ज्वल भविष्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चाहे साहित्य हो, संगीत हो या मीडिया, हिंदी अपनी शक्ति का लोहा मनवा रही है। उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी भारतीय भाषाओं के आपसी तालमेल पर बल दिया।
मैत्रेयी महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान तकनीक में इसकी स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला। वहीं, जाकिर हुसैन दिल्ली महाविद्यालय की डॉ. शर्मिष्ठा सेन ने बांग्ला भाषा के गौरवशाली इतिहास को साझा किया। उन्होंने 21 फरवरी 1952 की ढाका विश्वविद्यालय की उस ऐतिहासिक घटना को याद दिलाया, जहाँ युवाओं ने अपनी भाषा के सम्मान के लिए बलिदान दिया था।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय ढंग से हुआ।
इनकी रही मुख्य उपस्थिति
राजभाषा कार्यान्वयन समिति के संयोजक डॉ. पंकजेंद्र किशोर ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. अभिनव प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी की दूरदर्शी भूमिका रही। इस दौरान वरिष्ठ प्रोफेसर एवं मीडिया संयोजक प्रो. हंसराज सुमन, सुश्री सुकृति सोबती, डॉ. नीतू द्विवेदी, डॉ. विजित, डॉ. वंदना मुंजाल, डॉ. कैलाशी, डॉ. दीपा, डॉ. पूजा चीमा एवं श्री अमन यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


