Banga Electronics

Kidszee

हापुड : कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था दे रही हादसे को दावत


- पब्लिक और वाहनों की चेकिंग की व्यवस्था नहीं

(नवीन गौतम)
हापुड। सुरक्षा की दृष्टि से जिला एवं सत्र न्यायालय बेहद संवेदनशील माना जाता है। पूर्व में भी हापुड कचहरी कई बार रक्तरंजित हो चुकी है। 
हाल में ही शाहजहांपुर कचहरी में तीसरी मंजिल पर स्थित रिकार्ड रूम में वकील भूपेंद्र प्रताप सिंह की तमंचे से गोली मार हत्या कर दी गई। जिससे कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। जांच में पता चला कि एक वकील ने ही वकील की हत्या की है। सवाल खड़ा हुआ कि इतनी टाइट सुरक्षा के बाद तमंचा अंदर कैसे पहुंच गया। 
 हापुड कचहरी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। गेट पर किसी प्रकार की कोई सख्त चैकिंग नही दिखाई दी, जबकि हापुड कचहरी का एक ही गेट है और इसी गेट से वकीलों का भी आना-जाना रहता है। बावजूद इसके कचहरी की सुरक्षा दोयम दर्जे की है। हापुड बार एसोसिएशन के सचिव रविन्द्र निमेष ने बताया कि हापुड कचहरी परिसर में रोजाना सैकड़ों लोगों की आमद होती है। इनकी चेकिंग की परिसर में कोई खास व्यवस्था नहीं है। एक तरफ मेटल डिटेक्टर लगा है लेकिन वह भी काफी दिनों से बंद पड़ा हुआ है। जबकि गेट के दूसरी तरफ से बिना चैकिंग के कोई भी आ-जा सकता है।
 आपको बता दें कि हापुड कचहरी पहले भी इन हादसों से दहल चुकी है, 02 अप्रैल 2013, को हापुड़ में अदालत परिसर के भीतर दिन दहाड़े गैंगवार हुई थी। तीन बाइक पर सवार 9 बदमाशों ने नोयडा के रावण गैंग के शूटर अशोक भाटी को गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुला दिया था। हमले के बाद सभी बदमाश फ़रार हो गए। इस हमले में एक वकील भी घायल हुआ था। दूसरी घटना जनपद हापुड़ के गांव कनिया कल्याणपुर में हत्या के मामले में रिटायर्ड फौजी कुलदीप सजा काट रहा है। 23 जुलाई 2019 को हापुड कोर्ट में पेशी थी, इसी दौरान गांव के ही दूसरे पक्ष के दबंग ने धारदार हथियार से कुलदीप पर हमला कर दिया था। इसमें कुलदीप की गर्दन काफी कट गई पुलिस ने आनन-फानन में उच्चाधिकारियों को सूचना देते हुए कुलदीप नामक कैदी को घायल अवस्था में निकट के एक अस्पताल में भर्ती करवाया था। इस प्रकार की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए हापुड पुलिस प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। बृहस्पतिवार को हापुड कचहरी परिसर का पुलिस अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया उनके जाने के बाद कचहरी में तैनात पुलिसकर्मी मुस्तेद नजर नही आये। कुछ मोबाइल में लगे दिखाई पड़े तो कुछ छाव में कुर्सी पर बैठे हुए थे। 
  हापुड़ कचहरी में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तो तैनात हैं। लेकिन बम या अन्य किसी विस्फोटक की जांच करने के लिए पैकेज स्कैनर मशीन बंद है।
कचहरी में वैसे तो पुलिस और पीएसी के जवान सुबह दस बजे तैनात हो जाते हैं। लेकिन कुछ देर तक चेकिंग करने के बाद वह धूप और गर्मी से बचने के लिए इधर उधर छाए की तलाश कर गायब हो जाते हैं। इस दौरान कौन अंदर गया और कौन बाहर निकला, किसी को पता नहीं रहता।
 ऐसी स्थिति में अवैध हथियार, बम आदि की चेकिंग नहीं हो पाती है। जबकि पैकेज मशीन व मेटल डिटेक्टर का सही होना बहुत आवश्यक है।  
सीओ वैभव पाण्डे का कहना है कि समय समय पर वह सुरक्षा व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते रहते हैं, बृहस्पतिवार को भी कचहरी का निरीक्षण किया गया है। साथ ही सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को सुरक्षा को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। पैकेज स्कैनर व मेटल डिटेक्टर से चैकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।


- कचहरी की सुरक्षा में क्या होना चाहिए
- मुख्य गेट और न्यायालय परिसर के बाहर मेटल डिटेक्टर व पैकेज स्कैनर मशीन से सभी लोगो की चैकिंग होनी चाहिए।
- सुरक्षा को लेकर हर संदिग्ध व्यक्ति पर निगाह रखे।
- कचहरी में बिना काम के आने वाले लोगो से भी पूछताछ की जाए।
- समय समय पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए।