सुप्रीम कोर्ट : दस साल की सजा काट रहे व्यक्ति को किया बरी, मुआवजे का फैसला बरकरार
By -Naveen Gautam Shivkumar Rawat
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा काट रहे व्यक्ति को बरी करते हुए कहा, शादी के बादे से मुकरने का हर मामला दुष्कर्म नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में हाईकोर्ट के सजा के आदेश को खारिज कर दिया, हालांकि पीड़िता को मुआवजा देने का फैसला बरकरार रखा।
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी ने पूरी गंभीरता के साथ लड़की से शादी करने का वादा किया हो मगर बाद में उसके सामने कुछ ऐसे अप्रत्याशित हालात पैदा हो गए हो, जिन पर उसका नियंत्रण न हो और उसे न चाहते हुए भी शादी के गादे से पीछे हटना पड़ा हो। ऐसी स्थिति में उसके वादे को झूठा मानकर उसे धारा 376 के तहत दुष्कर्म का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
खुद विवाहित होने के बाद आरोपी से संबंध बनाए, बच्चा भी हुआ, तलाक लेकर कई साल रही साथ
पीठ ने कहा, इस मामले में रिकॉर्ड में लाया गया कि शिकायतकर्ता एक विवाहित महिला भी, जिसके तीन बच्चे थे। आरोपी उसके घर के सामने किराये पर रहता था। दोनों में नजदीकियां बढ़ी और इस रिश्ते में 2011 में एक बच्चा भी पैदा हुआ।
शिकायतकर्ता 2012 में आरोपी के गांव आई उसे पता कि यह शादीशुदा है और उसके बच्चे भी है। इसके बाद भी वह अलग-अलग पास छोड़कर चली गई जगहों पर आरोपी के साथ रहती रही। उसने 2014 में आपसी सहमति से पति को तलाक दिया और तीनों बच्चों को पति के पास छोड़कर चली गई।
बाद में शादी करने से किया इन्कार : पीठ ने कहा, बाद में कुछ विवाद हुआ तो शिकायतकर्ता ने 21 मार्च, 2015 को दुष्कर्म का मामला दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि शादी के वादे के बाद उसके साथ यौन संबंध बनाए, पर बाद में आरोपी ने उससे शादी करने से इन्कार कर दिया।


