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हापुड़ : नगर में धूम-धाम से निकाली गई भगवान परशुराम की भव्य शोभा यात्रा, जगह-जगह पुष्प वर्षा व भंडारे का किया गया आयोजन।

- भगवन परशुराम, हिंदू भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक 




- हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के अवतार परशुरामजी की जयंती मनाई जाती है।




रिपोर्ट- नवीन गौतम 
हापुड़। परशुराम जयंती के अवसर पर शुक्रवार को हापुड़ में सर्व ब्राह्मण समाज ने दिल्ली रोड स्थित केला देवी, के परशुराम मन्दिर से भगवान परशुराम की पालकी यात्रा निकाली गई। इस दौरान ब्राह्मण समाज के लोगों ने नगर में धूमधाम से पालकी यात्रा निकाली। इस दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा व भंडारे का आयोजन किया गया। 




इस अवसर पर ढोल, मंजीरे, शंख, घंटे, डमरू, ताशे, घोड़े, ऊट और धूनी के साथ यात्रा निकाली गई। पालकी यात्रा दिल्ली रोड स्थित भैरव मंदिर के बराबर परशुराम मंदिर से नगर का भ्रमण करते हुए स्वर्ग आश्रम रोड स्थित दो में फाटक के पास भगवान परशुराम मंदिर पर समापन हुई। 



इस मौके पर वरिष्ठ समाज सेवी पंडित नानक चन्द शर्मा ने कहा कि भगवान विष्णु के अवतार परशुराम समस्त मानव जाति के भगवान थे। 



हापुड़ नगर क्षेत्र के साथ ही जनपद के गावों में भी भगवान परशुराम जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। 
इस मौके पर पं0 नानक चन्द शर्मा, डॉ0 पराग शर्मा, वैध डॉ0 वरुण मिश्रा, डॉ0 अरुण मिश्रा, पं0 गोपाल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण शर्मा, काशी पंडित, अनिरुद्ध शर्मा उर्फ प्रिंस पंडित, सम्मी पंडित, एड0 अंकुर शर्मा, परवेस शर्मा, नितिन शर्मा, योगेन्द्र पंडित, गोपाल शर्मा, पं0 मुरलीधर शर्मा, अतुल शर्मा, मोनू बजरंग आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहें। 

राष्ट्रीय स्वाभिमान संघ ने भगवान परशुराम जयंती पर किया भंडारे का आयोजन 




हापुड़। भगवान श्री परशुराम के जन्मोत्सव पर राष्ट्र स्वाभिमान संघ ने फ्रीगंज रोड स्थित कार्यालय पर धूमधाम से भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव का आयोजन किया। जिसमें ब्राह्मण समाज द्वारा हापुड़ शहर में निकाली गई गई शोभायात्रा का फूल बरसा कर स्वागत किया एवं शोभा यात्रा में शामिल सभी भक्त जनों को जलपान की व्यवस्था कराई गई कार्यक्रम में राष्ट्र स्वाभिमान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशी पंडित, राष्ट्रीय महासचिव संगठन भारत भूषण शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता धीरज भारद्वाज, नगर अध्यक्ष पंडित मांगेराम शर्मा, मुकुल शर्मा, कुणाल शर्मा, विवेक शर्मा, कृष शर्मा, विपुल शर्मा, राहुल पंडित, हेमंत त्यागी, राकेश शर्मा नान, गौरी शर्मा नान, शम्मी पंडित, नितिन शर्मा, प्रवेश शर्मा, मनीष शर्मा, आदि लोग मौजूद रहें।

यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के तत्वाधान में मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

हापुड़। संपूर्ण भारतवर्ष में पूजे जाने वाले विष्णु भगवान के छठे अवतार भगवान परशुराम की जन्मोत्सव के उपलक्ष में यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के जिला मुख्यालय पर भगवान परशुराम जयंती मनाई गई। इस मौके पर यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय त्यागी, हनी त्यागी पिलाना, शिवम त्यागी, मोहित पाल, राहुल पंडित, उमंग पड़ित, निखिल त्यागी, केशव त्यागी, सन्नी त्यागी, प्रशांत गौड़ आदि मौजूद रहें।


हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के अवतार परशुरामजी की जयंती मनाई जाती है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, ऐसे में वैशाख तृतीया तिथि और प्रदोष काल में भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। 



अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह तिथि एक अबूझ मुहूर्त है, जिसमें किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त का विचार कर किया जा सकता है। भगवान परशुराम के बारे में सतयुग से लेकर द्वापर युग और कलयुग में अनेक कथाएं मिलती हैं। 




- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने गए हैं। 




-  भगवान परशुराम कलयुग में मौजूद आठ चिरंजीवी में से एक हैं जो आज भी धरती पर मौजूद हैं। 

- अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी। 

-  भगवान परशुराम भगवान शिव और भगवान विष्णु के संयुक्त अवतार माने जाते हैं।

- भगवान परशुराम ऋषि जमदग्रि की संतान थे। पिता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान परशुराम ने अपनी मां का वध कर दिया था। तब इस पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या थी। 

- भगवान परशुराम ने अपने माता- पिता के अपमान का बदला लेने के लिए 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय राजाओं से विहीन कर दिया था।

भगवान परशुराम का स्वभाव क्रोधी था इस कारण सभी देव और दानव इनसे भयभीत रहा करते थे। भगवान परशुराम के क्रोध का सामना भगवान गणेश ने भी किया था। जब भगवान परशुराम कैलाश पर भगवान शिव से मिलने जा रहे थे तब श्रीगणेश ने उन्हें मिलने से रोक दिया था, जिससे क्रोथ में आकर परशुराम जी ने गणेशजी का एक दांत तोड़ डाला था। तभी से भगवान गणेश का एक नाम एकदंत पड़ा।