Report By: Nadeem Naqvi
हापुड़। बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन संघर्ष अराजनैतिक ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश पदम सिंह ने आरोप लगाया है कि बिजलीकर्मियों द्वारा उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाकियू संघर्ष अराजनैतिक का कहना है कि स्मार्ट मीटरों की रीडिंग अत्यधिक तेज है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को पुराने मीटरों की तुलना में दोगुना और तिगुना बिजली बिल मिल रहा है। इससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर तकनीकी खराबी के चलते गलत रीडिंग दर्ज हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
संगठन ने प्रीपेड मीटर प्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बैलेंस समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति तत्काल काट दी जाती है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उपभोक्ता परिषद की मांग है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य न किया जाए, बल्कि इसे वैकल्पिक रखा जाए ताकि उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार निर्णय ले सकें।
पदम सिंह ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना में प्रीपेड मीटर को अनिवार्य करने की शर्त को हटा दिया गया है। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए जाने की कार्रवाई जारी है, जो पूरी तरह अनुचित है।
भाकियू संघर्ष अराजनैतिक ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो संगठन प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों में भी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगने दिए जाएंगे।



