Report By: Nadeem Naqvi
हापुड़। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण और शहरीकरण का सीधा असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। वायु और जल प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर ने श्वसन और त्वचा संबंधी रोगों को गंभीर रूप से बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में और अधिक चिंताजनक हो सकती है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. वेदांत वर्मा ने बताया कि दिल्ली सहित एनसीआर के शहरों—जैसे हापुड़—में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। इसके चलते लोगों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसे रोग तेजी से फैल रहे हैं। इसके अलावा त्वचा एलर्जी, खुजली और अन्य समस्याएं भी आम होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि खराब हवा और दूषित पानी के कारण फेफड़ों की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में सांस फूलना, लगातार खांसी, गले में खराश, छाती में जकड़न और आंखों में जलन जैसे लक्षण अब सामान्य हो गए हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि बच्चों पर इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और लाखों बच्चे श्वसन संबंधी बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
डॉ. वर्मा ने आमजन को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के अधिक स्तर के समय, विशेषकर सुबह 6 से 9 बजे और शाम 4 से 7 बजे के बीच, घर की खिड़कियां बंद रखें। बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचाना चाहिए। इसके अलावा, घर में एयर प्यूरीफायर और हरे पौधों का उपयोग लाभकारी हो सकता है। बाहर निकलते समय मास्क पहनना जरूरी है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
होम्योपैथी से इम्युनिटी को मिलती है मजबूती
डॉ. वेदांत वर्मा के अनुसार, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति श्वसन एवं त्वचा रोगों में प्रभावी भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाओं का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में इसके सकारात्मक परिणाम अधिक देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाना बेहद आवश्यक है और होम्योपैथी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।



