अभिलेखों में श्रेणी-3 की है भूमि
शिकायतकर्ता अमित त्यागी, सुरेंद्र सिंह व अन्य ने साक्ष्यों के साथ बताया कि स्वर्ग आश्रम रोड स्थित खसरा संख्या 248 (क्षेत्रफल 1.5690 हेक्टेयर) राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-3 की भूमि दर्ज है। यह ऐसी भूमि है जो जलमग्न रहती है और सिंघाड़े उगाने के प्रयोग में लाई जाती है। नियमों के अनुसार, इस प्रकार की भूमि पर आसामी को कभी भी 'संक्रमणीय भूमिधर' (मालिकाना हक) के अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते।
राजस्व कर्मियों की मिलीभगत का आरोप
जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने राजस्व कर्मचारियों से सांठगांठ कर नियम विरुद्ध तरीके से अपने नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा लिए हैं। आरोप है कि राजकुमार व जगदीश नामक व्यक्तियों ने बिना किसी कानूनी अधिकार के इस कीमती भूमि के विक्रय पत्र निष्पादित कर दिए हैं और अब वहां अवैध रूप से प्लॉटिंग की जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि कानूनन कोई भी व्यक्ति अपने अधिकार से बेहतर अधिकार दूसरे को ट्रांसफर नहीं कर सकता। जब विक्रेताओं के पास ही मालिकाना हक नहीं था, तो वे इसे बेच नहीं सकते। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि खसरा संख्या 248 पर चल रही अवैध प्लॉटिंग और निर्माण को तुरंत रोका जाए। फर्जी तरीके से किए गए विक्रय पत्रों (बैनामे) की जांच कर उन्हें निरस्त किया जाए। इस साठगांठ में शामिल भू-माफियाओं और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दंडित किया जाए। इस दौरान शिकायतकर्ताओं ने खतौनी और अन्य संबंधित दस्तावेज भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं। जिलाधिकारी कार्यालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
वीएन प्रापर्टीज का कथन...
शिकायत करने वालों का कोई लेना-देना नहीं है। उनकी भूमि का खसरा नंबर 1950 के बंदोबस्त एक्ट में समायोजित हो चुका है। अब यह वास्तविक मालिकों से विधिवत ली गई है। इस पर निर्माण मानकों के तहत हो रहा है। सभी अधिकारियों के संज्ञान में मामला है। इसलिए रुकने वाला नहीं है। कुछ लोग बेवजह दबाव बना रहे हैं।
- प्रवक्ता, वीएन प्रापर्टीज



