रिपोर्ट - राजेंद्र सिंह
हापुड़। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंदरूनी कलह और गुटबाजी अब पूरी तरह बेकाबू होकर सड़कों से होती हुई सोशल मीडिया पर आ गई है। जनपद में बसपा के अनुशासित होने के सारे दावे हवा हो चुके हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच सरेआम मर्यादा की सीमाएं लांघती हुई तीखी बहस छिड़ गई है, जिससे पार्टी की जमकर किरकिरी हो रही है।
गंभीर आरोपों से घिरे जिलाध्यक्ष और प्रत्याशी
पार्टी के भीतर पनप रहे भारी असंतोष के बीच आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने वर्तमान जिलाध्यक्ष और प्रभारी प्रत्याशी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने इन बड़े चेहरों पर मनमानी, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कई बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा है कि वे अब संगठन के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाने लगे हैं।
चुनावी नैया डूबने का खतरा! राजनैतिक गलियारों में चर्चा:
स्थानीय राजनैतिक जानकारों का मानना है कि ऐन चुनाव से पहले बसपा के भीतर मचे इस घमासान और "गृहयुद्ध" जैसी स्थिति से पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कार्यकर्ताओं की इस खुली बगावत ने साफ कर दिया है कि हापुड़ बसपा में सब कुछ ठीक नहीं है। नेतृत्व के खिलाफ इस कदर फूटे गुस्से ने विरोधी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे स्थानीय राजनीति में भारी गरमाहट आ गई है और बसपा बैकफुट पर नजर आ रही है।


