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हापुड़: सिटी कोतवाली से बाबा साहब की तस्वीर हटने पर आक्रोश, शासनादेश के उल्लंघन का आरोप


(वर्तमान समय में थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान के कार्यकाल में कार्यालय में नहीं लगीं बाबा साहब को तस्वीर)

- सामाजिक संगठनों ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध, मुख्यमंत्री के 2017 के आदेश की याद दिलाई।

हापुड़। स्थानीय सिटी कोतवाली में संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर न होने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश है। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर इस स्थिति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।


फाइल फोटो...(पूर्व कोतवाल विनोद पांडे के समय में थाना कार्यालय में लगीं बाबा साहब को तस्वीर)

पूर्व प्रभारियों के समय लगी थी तस्वीर, अब हटाने का आरोप

विरोध दर्ज करा रहे लोगों का सीधा आरोप है कि सिटी कोतवाली में पूर्व में तैनात रहे कोतवाली प्रभारियों के कार्यकाल के दौरान प्रभारी कार्यालय में बाबा साहब की तस्वीर सम्मानपूर्वक लगी हुई थी। लेकिन वर्तमान में इस तस्वीर को वहां से हटा दिया गया है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

योगी सरकार के शासनादेश की सरेआम धज्जियां

प्रदर्शन और विरोध कर रहे लोगों ने याद दिलाया कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 दिसंबर 2017 को एक ऐतिहासिक शासनादेश जारी किया था। इस आधिकारिक अधिसूचना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी थानों, सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगाना अनिवार्य किया गया था। सिटी कोतवाली में तस्वीर का न होना सीधे तौर पर शासन के आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है।
फाइल फोटो...(पूर्व कोतवाल मुनीष प्रताप के समय में थाना कार्यालय में लगीं बाबा साहब को तस्वीर)

क्या कहता है 2017 का सरकारी नियम (शासनादेश)?
अनिवार्य स्थान: राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, सचिवालय, निगमों, परिषदों, सार्वजनिक उपक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और विशेष रूप से सभी पुलिस थानों में बाबा साहब की तस्वीर लगाना अनिवार्य है।
तस्वीर का मानक विवरण: शासनादेश के अनुसार, तस्वीर पर बाबा साहब का पूरा नाम 'डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर' अंकित होना चाहिए। इसके साथ ही चित्र के नीचे उनकी जन्म तिथि और महापरिनिर्वाण तिथि का उल्लेख होना भी अनिवार्य है।
मूल उद्देश्य: इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य संविधान निर्माता को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान देना और उनके महान आदर्शों व विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है।

डीजीपी के निर्देशों को भी ठेंगा
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार के इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) स्तर से भी समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद हापुड़ सिटी कोतवाली में इस तरह की लापरवाही सामने आना पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

(सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोग कर रहे विरोध दर्ज)

सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पूरे सम्मान के साथ कोतवाली प्रभारी के कार्यालय में नियमानुसार बाबा साहब की तस्वीर वापस नहीं लगाई गई, तो वे इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।