- राजकीय पुस्तकालय को सड़क पार 'रावण ग्राउंड' में शिफ्ट करने की मांग, मैदान से अवैध दुकानें हटाने पर दिया जोर
- रामलीला मैदान के अस्तित्व पर संकट: राजकीय पुस्तकालय के लिए हुई तारबंदी से तीन हिस्सों में बंटा ऐतिहासिक मैदान
- श्री रामलीला समिति ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार; खसरा नंबर-193 की जगह सड़क पार खसरा नंबर-409 में पुस्तकालय स्थानांतरित करने की मांग
रिपोर्ट - नवीन गौतम
हापुड़। नगर के ऐतिहासिक और सैकड़ों वर्ष पुराने रामलीला मैदान के अस्तित्व पर इस समय गहरा संकट मंडरा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा मैदान की भूमि पर जिला राजकीय पुस्तकालय के निर्माण के लिए की गई तारबंदी के बाद रामलीला मैदान तीन भागों में विभाजित हो गया है। इससे भविष्य में भव्य रामलीला मंचन, प्रसिद्ध शहीद मेला और भीम मेले के आयोजन पर पूरी तरह रोक लगने की आशंका पैदा हो गई है। इस गंभीर समस्या को लेकर 'श्री रामलीला समिति (रजि०), हापुड़' के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जनहित और सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
समिति द्वारा सौंपे गए पत्र के अनुसार, दिल्ली रोड स्थित रामलीला मैदान (खसरा नंबर-193मि०, 195 और 409) में सदियों से भव्य राममंचन और अन्य बड़े धार्मिक व सामाजिक आयोजन होते आ रहे हैं। करीब सैकड़ों वर्ष पूर्व तत्कालीन जिला प्रशासन ने आम जनता के आवागमन के लिए दिल्ली रोड से चमरी रोड को जोड़ने हेतु रामलीला मैदान की निजी भूमि (खसरा नंबर-193मि०) से रास्ता लिया था। इस बंजर भूमि के बदले में रामलीला समिति को कोई मुआवजा नहीं मिला था, बल्कि आम जनता के हित में यह रास्ता छोड़ दिया गया था।
अब वर्तमान जिला प्रशासन द्वारा उसी खसरा नंबर-193मि० के अंतर्गत दर्ज 0.1630 हेक्टेयर बंजर भूमि में से 0.1000 हेक्टेयर भूमि जिला राजकीय पुस्तकालय को आवंटित कर दी गई है। गत 2 जून 2026 को तहसील प्रशासन द्वारा इस भूमि पर तारबंदी भी करा दी गई, जिससे यह ऐतिहासिक मैदान पूरी तरह खंडित हो गया है।
तीन भागों में बंटा मैदान, मंचन हुआ असंभव
प्रस्तुत किए गए नक्शा नजरी के अनुसार, इस तारबंदी के कारण खसरा नंबर-193, जिसमें रामलीला के समय विशाल मेले का आयोजन होता है, और खसरा नंबर-195, जहाँ रामलीला का मुख्य स्टेज (मंच) बना हुआ है, के बीच का संपर्क और आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। समिति का कहना है कि यदि मैदान इसी तरह तीन टुकड़ों में बंटा रहा, तो भविष्य में यहाँ किसी भी बड़े धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।
रामलीला समिति ने सुझाया व्यावहारिक विकल्प
धार्मिक आस्था और विकास दोनों का संतुलन बनाए रखने के लिए श्री रामलीला समिति के प्रधान विनोद कुमार वर्मा और महामंत्री उमेश अग्रवाल ने जिलाधिकारी के समक्ष एक अत्यंत व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। समिति ने मांग की है कि राजकीय पुस्तकालय को वर्तमान विवादित स्थान (खसरा नंबर-193मि०) से हटाकर, ठीक उसके सामने सड़क के दूसरी पार स्थित खसरा नंबर-409 (रावण ग्राउंड वाले हिस्से) में स्थानांतरित कर दिया जाए। इस वैकल्पिक स्थान पर पुस्तकालय का निर्माण होने से श्री रामलीला समिति को कोई आपत्ति नहीं होगी और जिला प्रशासन का सरकारी कार्य भी बिना किसी विवाद के शांतिपूर्वक पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही समिति ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि रामलीला मैदान की पैमाइश कराकर उसकी चारदीवारी कराई जाए और नक्शे में दर्शाए गए अवैध रास्तों, फाटकों तथा अवैध रूप से खुली मुर्गे व मीट की दुकानों को तुरंत बंद कराया जाए।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
समिति के पदाधिकारियों—रतन लाल गुप्ता, नवीन कुमार वर्मा, शुभम गोयल (एडवोकेट), हरि प्रकाश जिन्दल और कपिल अग्रवाल सहित सभी कार्यकारी सदस्यों ने एक सुर में कहा कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, लेकिन पुस्तकालय के लिए ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक आस्था के केंद्र को नष्ट करना न्यायसंगत नहीं है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं की कद्र करते हुए इस जनहित और धर्महित से जुड़े मामले पर क्या त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेता है।


