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हापुड़: साप्ताहिक राम बाजार को बंद कराने की साजिश नाकाम करे प्रशासन: रामलीला समिति ■ सांसद के पत्र पर हो रही एकतरफा जांच को रोकने के लिए जिलाधिकारी को सौंपा शिकायती पत्र


■ सांसद के पत्र पर हो रही एकतरफा जांच को रोकने के लिए जिलाधिकारी को सौंपा शिकायती पत्र

■ श्री रामलीला समिति का आरोप: समाज विरोधी तत्व और भू-माफिया गरीबों का कर रहे हैं उत्पीड़न

■ साप्ताहिक 'राम बाजार' बंद कराने की साजिश के विरोध में उतरे 500 से अधिक गरीब परिवार

रिपोर्ट - नवीन गौतम 
हापुड़। स्थानीय श्री रामलीला मैदान की संरक्षित भूमि पर अवैध कब्जे और वहां लगने वाले साप्ताहिक 'राम बाजार' को बंद कराने की साजिश के खिलाफ श्री रामलीला समिति (रजि.) हापुड़ ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। समिति ने जिलाधिकारी हापुड़ को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच कराने और भू-माफियाओं द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करने की मांग की है।

गरीबों की रोजी-रोटी पर संकट
श्री रामलीला समिति के महामंत्री उमेश अग्रवाल और अध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में बताया गया है कि पिछले करीब 8 वर्षों से वर्ष 2018 में पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में पारित प्रस्ताव संख्या-34 के आधार पर प्रत्येक रविवार को रामलीला मैदान में साप्ताहिक राम बाजार (पैंठ) का आयोजन किया जाता है। इस बाजार से क्षेत्र के लगभग 400 से 500 गरीब और मजदूर परिवार अपनी अस्थाई दुकानें और ठेले लगाकर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।

साजिश के तहत सांसद को गुमराह करने का आरोप
समिति का आरोप है कि इलाके के कुछ नामजद दबंग और भू-माफिया, जिनमें अशोक (मुर्गे वाला), उसका भाई जयप्रकाश उर्फ जे.पी., राजेश, अमित, जयभगवान और अन्य शामिल हैं, इस बाजार में आने वाले गरीब दुकानदारों से अवैध वसूली का प्रयास करते हैं। विरोध करने पर इन लोगों ने साज़िश के तहत मोहल्ला लज्जापुरी के निवासियों की ओर से झूठे और मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर माननीय सांसद महोदय को एक शिकायती पत्र भिजवा दिया। सांसद महोदय के इसी पत्र के आधार पर वर्तमान में जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी हापुड़ द्वारा जांच कराई जा रही है।

धार्मिक स्थल के पास अवैध मीट की दुकान और अतिक्रमण
शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि इन दबंगों ने खसरा संख्या-414 (बंजर भूमि) और आम जनता के रास्ते पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कर लिया है। इतना ही नहीं, श्री राम मंदिर से मात्र 50-60 मीटर की दूरी पर रामलीला मैदान की भूमि पर अपने गेट लगाकर और अवैध रूप से मीट व मुर्गे की दुकान खोलकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

उच्च न्यायालय से भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं
दस्तावेज़ों के अनुसार, इन तत्वों द्वारा पूर्व में भी दबाव बनाने के उद्देश्य से माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में सिविल रिट (संख्या-8195/2021) और तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ एक अवमानना याचिका (सिविल कन्टैम्प्ट संख्या-3745/2019) दाखिल की गई थी, जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 9 जुलाई 2019 को ही खारिज किया जा चुका है।

समिति की मांग: हमारा पक्ष भी सुना जाए
श्री रामलीला समिति ने जिलाधिकारी से पुरजोर मांग की है कि वर्तमान में की जा रही जांच एकपक्षीय न हो। न्यायहित में समिति का पक्ष और उनके द्वारा प्रेषित जवाब/आपत्ति को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि झूठे तथ्यों के आधार पर इस जनहित और गरीब-हित में लगने वाले बाजार को बंद कराया गया, तो सैकड़ों परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। समिति ने प्रशासन से भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और उनके द्वारा भेजे गए फर्जी प्रार्थना पत्र को तुरंत खारिज करने की अपील की है।